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छेरछेरा: छत्तीसगढ़ का ‘महादान’ पर्व – परंपरा, संस्कृति और सरगुजा की माटी का उल्लास

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छेरता पर्व (छेरछेरा) | Chherta (Chherchhera)– छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का आत्मीय पर्व छत्तीसगढ़ की माटी में रची-बसी परंपराएँ आज भी यहाँ की पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं। इन्हीं परंपराओं में एक अत्यंत लोकप्रिय और आत्मीय लोकपर्व है छेरता (Chherta), जिसे आम बोलचाल में छेरछेरा भी कहा जाता है। यह पर्व केवल मांगने या देने का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, सहयोग और लोकजीवन की सामूहिक भावना का प्रतीक है। छत्तीसगढ़, जिसे हम ‘धान का कटोरा’ कहते हैं, यहाँ की संस्कृति में कृषि और उत्सव एक-दूसरे के पूरक हैं। जब खेतों में सुनहरी फसल लहलहाकर खलिहानों तक पहुँचती है और किसानों की मेहनत सफल होती है, तब छत्तीसगढ़ की धरती एक अनूठे स्वर में गा उठती है— “छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेर हेरा!” पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला छेरछेरा का त्यौहार केवल एक स्थानीय पर्व नहीं है, बल्कि यह दान की महिमा, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महाअनुष्ठान है। आज MyAmbikapur.com के इस विशेष ब्लॉग में, हम छेरछेरा के इतिहास, धार्मिक महत्व, लोक मान्यताओं और अंबिकापुर समेत पूरे सरगुजा संभाग में इसके रंगारंग स्वरूप पर विस्तार से चर्चा करेंगे। छेरछेरा (छेरता) का अर्थ ‘छेरछेरा’ (Chherchhera) शब्द सुनते ही छत्तीसगढ़ी मानस में एक चित्र उभरता है— हाथ में झोला लिए बच्चों की टोलियाँ और द्वारों पर दान करते गृहस्थ। ‘छेर’ का अर्थ होता है मांगना और ‘छेरा’ का मतलब है दान देना। यानी यह पर्व मांगने और देने के संतुलन का पर्व है। छेरछेरा का मूल भाव यह सिखाता है कि समाज में किसी को भी भूखा या वंचित नहीं रहना चाहिए। एक अन्य मान्यता अनुसार – ‘छेर’ और ‘छेरा’ का शाब्दिक अर्थ ‘छह’ और ‘छह’ के योग से भी जोड़ा जाता है, लेकिन लोक संस्कृति में यह ‘छय’ (नष्ट होना) और ‘अक्षय’ (कभी समाप्त न होना) के दर्शन को भी दर्शाता है। छेरता पर्व की परंपरा कैसे निभाई जाती है? छेरछेरा के दिन बच्चे, युवक और कभी-कभी बुजुर्ग भी समूह बनाकर घर-घर जाते हैं और पारंपरिक स्वर में छेरता मांगते हैं। यह एक तरह से नारे जैसा होता है जिससे लोगों को पता चलता है कि घर में छेरता मांगने वाले लोग आये हैं। इस दिन का मुख्य नारा है: “छेरछेरा, कोठी के धान ल हेर हेरा, अरन बरन कोदो करन, जब्भे देबे तब्भे टरन।” इसका अर्थ है: “छेरछेरा आ गया है, अपनी कोठी से धान बाहर निकालिए। अन्न-दान कीजिए, जब आप दान देंगे तभी हम आपके द्वार से अगले द्वार की ओर बढ़ेंगे।” इसके बदले में घर के लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार धान, चावल, चिउड़ा, तिल, गुण इत्यादि का दान करते हैं। यह सब बहुत ही हँसी-खुशी और सम्मान के साथ किया जाता है। ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि छेरछेरा (Chherchhera) के पीछे कई पौराणिक कथाएं और ऐतिहासिक संदर्भ मिलते हैं, जो इस त्यौहार को आध्यात्मिक गहराई प्रदान करते हैं। माता अन्नपूर्णा (शाकंभरी) का अवतरण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन ही माता पार्वती ने शाकंभरी के रूप में अवतार लिया था। कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर भीषण अकाल पड़ा, तब माता ने अन्न की अधिष्ठात्री देवी बनकर धरती को हरा-भरा किया और भूखे जीवों को अन्न प्रदान किया। इसी स्मृति में लोग दान-पुण्य करते हैं ताकि उनके घर में कभी अन्न की कमी न हो। राजा कल्याण साय की ऐतिहासिक कथा एक अन्य किंवदंती छत्तीसगढ़ के रत्नपुर (रतनपुर) राज्य के राजा कल्याण साय से जुड़ी है। कहा जाता है कि राजा कल्याण साय मुगल दरबार में काफी समय बिताने के बाद जब वापस अपनी राजधानी रत्नपुर लौटे, तो प्रजा ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। राजा ने खुशी में अपनी प्रजा को स्वर्ण मुद्राएं और अन्न दान किया। उसी दिन से प्रजा की खुशहाली के प्रतीक के रूप में घर-घर जाकर अन्न मांगने और दान देने की यह परंपरा (Chherta) शुरू हुई। छेरछेरा की तैयारी और अनुष्ठान छेरछेरा त्यौहार की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। चूंकि यह फसल कटाई के तुरंत बाद आता है, इसलिए किसानों के घरों में संपन्नता का वास होता है। लोक परंपरा: टोलियों का भ्रमण और लोकड़ी नृत्य छेरछेरा (Chherchhera) की असली रौनक गलियों में होती है। इस पर्व को अलग-अलग टोलियों के माध्यम से समझा जा सकता है: बच्चों की छेरता की टोली (Children’s Chherta Group) छोटे बच्चे सबसे पहले तैयार होकर निकलते हैं। वे घर-घर जाकर उत्साहपूर्वक “छेरछेरा” चिल्लाते हैं। यह उद्घोष स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है। अंबिकापुर के आसपास के क्षेत्रों में बच्चे “छेर छेरता” चिल्लाते हैं। बच्चे दिन के अलग अलग समय में अलग अलग चीज मांगते हैं। प्रायः सुबह से दोपहर के समय बच्चे पहले चिउड़ा मांगते हैं फिर चावल और इसके बाद कहीं कहीं धान भी मांगते हैं।गृहणियां प्रेमपूर्वक बच्चों के झोलों में मुट्ठी भर-भरकर धान, चावल या चिवड़ा और गुड़ डालती हैं। इसके बाद बच्चे खुश होकर अगले घर की ओर प्रस्थान करते हैं। लोकड़ी नृत्य की टोली लोकड़ी नृत्य छेरता के दिन रात्रि के समय में होता है। लोकड़ी नृत्य में लोकड़ी गीतों का गायन भी टोली द्वारा किया जाता है। लोकड़ी में ज्यादातर बच्चे भाग लेते हैं लेकिन कभी कभी युवाओं की टोली भी लोकड़ी नृत्य करती है। एक टोली में सामान्यतः 5-10 सदस्य होते हैं । इससे कम या ज्यादा सदस्य भी हो सकते हैं। ये टोली घर घर जाकर लोकड़ी गीतों के साथ नृत्य प्रस्तुत करती है। कुछ लोग अपने साथ वाद्य यंत्र भी रखते हैं। लोकड़ी नृत्य में गीतों के माध्यम से लोकड़ी मांगा जाता है (सामान्यतः धान और चावल)। घर के मालिक अपने सामर्थ्य अनुसार धान और चावल देते हैं। एक घर से धान और चावल मिलने के बाद टोली दूसरे घर जाती है। इस तरह पूरे गांव में भ्रमण किया जाता है। लोकड़ी से प्राप्त धान और चावल इत्यादि से होने वाली आय से प्रायः बच्चे पिकनिक करते हैं। दान की वैज्ञानिक और सामाजिक महत्ता क्या छेरछेरा (Chherta) केवल मांगने का त्यौहार है? बिल्कुल नहीं। इसके पीछे गहरा सामाजिक दर्शन छिपा है: अंबिकापुर और सरगुजा अंचल में छेरता का महत्व (Importance of Chherta festival in Ambikapur and Surguja) अंबिकापुर और पूरे सरगुजा अंचल में छेरता (Chherta )का विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। यहाँ यह पर्व केवल एक रस्म

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CGBSE 10th 12th Board Exam 2026 Preparation Tips: छत्तीसगढ़ बोर्ड में ज्यादा मार्क्स कैसे पाएं?

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बोर्ड परीक्षाएँ (10वीं और 12वीं) विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ होती हैं। ये न केवल ज्ञान का आकलन करती हैं, बल्कि भविष्य के करियर की नींव भी रखती हैं। सही रणनीति, योजना और माता-पिता के सहयोग से इन परीक्षाओं में शानदार सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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बांकी डैम अंबिकापुर का खूबसूरत पिकनिक स्पॉट | Banki Dam Ambikapur – Amazing Picnic Spot

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यह सिर्फ एक जलाशय नहीं है बल्कि अंबिकापुर की जीवन रेखा कहना भी गलत नहीं होगा। यह डैम अंबिकापुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की प्यास बुझाता है, कृषि को सहारा देता है, और अपने चारों ओर हरे-भरे परिदृश्य के साथ एक अद्भुत सुकून का अनुभव कराता है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम बांकी डैम के इतिहास, इसके पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व, जल गुणवत्ता, और एक शानदार पिकनिक या यात्रा स्थल के रूप में इसके आकर्षण की गहराई से पड़ताल करेंगे।

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CTET February 2026 Exam: Form भरने से लेकर तैयारी तक पूरी गाइड

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नमस्ते अंबिकापुर के सभी भावी शिक्षकों! सरकारी शिक्षक बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है। CBSE ने CTET February 2026 सेशन के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह आपके लिए एक सुनहरा मौका है, जिसकी तैयारी में अब एक पल की भी देरी नहीं करनी चाहिए। myambikapur.com आपके लिए इस परीक्षा से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी, आवेदन प्रक्रिया से लेकर सफल तैयारी की रणनीति तक, सब कुछ लेकर आया है। 🗓️ CTET 2026 महत्वपूर्ण तिथियां (CTET 2026 Important Dates) – तुरंत नोट करें! CBSE द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, CTET February 2026 की महत्वपूर्ण तिथियाँ इस प्रकार हैं: इवेंट तिथि/अवधि ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि 27 नवंबर 2025 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 फीस जमा करने की अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 फॉर्म सुधार विंडो 23 से 26 दिसंबर 2025 (संभावित) CTET परीक्षा की तिथि 8 फरवरी 2026 (रविवार) एडमिट कार्ड जारी फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में 💡 ध्यान दें: आवेदन की अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 है। आखिरी समय की भीड़ से बचने के लिए तुरंत आवेदन करें! 📝 CTET February 2026 आवेदन प्रक्रिया (How to Apply Online) ऑनलाइन आवेदन केवल ऑफिशियल वेबसाइट ctet.nic.in पर ही स्वीकार किए जाएंगे। CTET आवेदन के लिए नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करें: श्रेणी केवल पेपर I या II के लिए दोनों पेपर I और II के लिए General / OBC (NCL) ₹1,000 ₹1,200 SC / ST / Differently Abled ₹500 ₹600 📊 CTET परीक्षा पैटर्न और सिलेबस (CTET Exam Pattern & CTET Syllabus) CTET में दो पेपर होते हैं: दोनों पेपर ऑफलाइन मोड (पेन और पेपर) में होंगे और प्रत्येक में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) होंगे। कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। पेपर I (कक्षा I-V के लिए) का पैटर्न विषय प्रश्नों की संख्या कुल अंक बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP) 30 30 भाषा I (अनिवार्य) 30 30 भाषा II (अनिवार्य) 30 30 गणित 30 30 पर्यावरण अध्ययन (EVS) 30 30 कुल 150 150 पेपर II (कक्षा VI-VIII के लिए) का पैटर्न विषय प्रश्नों की संख्या कुल अंक बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP) 30 30 भाषा I (अनिवार्य) 30 30 भाषा II (अनिवार्य) 30 30 गणित और विज्ञान या सामाजिक अध्ययन/विज्ञान 60 60 कुल 150 150 CTET Syllabus के मुख्य विषय 🎯 CTET February 2026 के लिए अंबिकापुर स्पेशल तैयारी की रणनीति सिर्फ 70-75 दिनों में CTET कैसे पास करें? यह रही आपकी अचूक रणनीति: 🔥 CTET में 90+ Marks लाने के Tips 🏆 CTET Certificate Validity CTET certificate अब lifetime valid है, यानी आपको दुबारा qualify करने की जरूरत नहीं पड़ती। Useful Resources संबंधित पोस्ट पढ़ें CTET 2026 Preparation Strategy: एक Complete Guide 2025 में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें — सम्पूर्ण गाइड CGPSC 2025: अंबिकापुर और छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर! निष्कर्ष CTET February 2026 की परीक्षा तिथि 8 फरवरी 2026 निर्धारित है। समय सीमित है, इसलिए अपनी तैयारी आज से ही शुरू कर दें। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षक बनने की दिशा में आपका पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। myambikapur.com की तरफ से आप सभी उम्मीदवारों को ढेर सारी शुभकामनाएं!

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CGPSC 2025: अंबिकापुर और छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर!

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CGPSC Latest Vacancy 2025 छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने राज्य सेवा परीक्षा (State Service Examination – SSE 2025) के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन (CGPSC 2025) जारी कर दिया है! यह घोषणा अंबिकापुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ के सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी खबर है। इस वर्ष, 17 विभिन्न सरकारी विभागों में कुल 238 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिनमें डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। यह भर्ती राज्य के प्रशासनिक ढांचे में शामिल होने और एक स्थिर सरकारी करियर बनाने का एक शानदार मौका है। मुख्य तिथियाँ (Important Dates) – CGPSC Notification 2025 फॉर्म भरने और परीक्षा की तारीखों पर तुरंत ध्यान दें: इवेंट तिथि ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ 1 दिसंबर 2025 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2025 प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) की तिथि 22 फरवरी 2026 मुख्य परीक्षा (Mains) की संभावित तिथि 16, 17, 18 और 19 मई 2026 🎯पदों का विवरण (Vacancy Details) कुल 238 रिक्तियों में कुछ प्रमुख पद इस प्रकार हैं: इसके अलावा भी अन्य विभागीय प्रशासनिक पद भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। विस्तृत विज्ञापन (CGPSC Notification 2025 ) के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं https://psc.cg.gov.in/ ✅CG PSC 2025 Eligibility Criteria (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2025 की पात्रता का मापदंड) CGPSC 2025 की अधिक जानकारी के लिए CGPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। 🔎 परीक्षा प्रक्रिया (Selection Process & Exam Pattern) CGPSC 2025 की परीक्षा तीन चरणों में पूरी होती है— प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) मुख्य परीक्षा (Mains) साक्षात्कार (Interview / Personality Test) इसके अंक भी फाइनल मेरिट में जोड़े जाते हैं। 📝 आवेदन कैसे करें? (How to Apply?) आवेदन केवल CGPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर ही स्वीकार किए जाएंगे। 💡 प्रो टिप: अंतिम तिथि का इंतज़ार न करें! सर्वर पर लोड बढ़ने से बचने के लिए 1 दिसंबर को आवेदन शुरू होते ही जल्द से जल्द फॉर्म भर दें। 📌 आवेदन शुल्क छत्तीसगढ़ निवासी आरक्षित वर्ग: शुल्क में छूट अन्य राज्य के अभ्यर्थी: सामान्य शुल्क लागू (सटीक शुल्क विवरण आधिकारिक अधिसूचना में देखा जा सकता है।) 💡 क्यों है यह अवसर खास? 📌 निष्कर्ष CGPSC 2025 की यह भर्ती उन सभी अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाना चाहते हैं। यदि आप अपने भविष्य को सुरक्षित और सम्मानजनक दिशा देना चाहते हैं, तो समय रहते आवेदन अवश्य करें।

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Shankar Ghat, Ambikapur – एक शांत और धार्मिक स्थान

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क्या आप अंबिकापुर शहर के शोर से दूर, शांति और आध्यात्म की तलाश में हैं? तब आपको शंकर घाट ज़रूर जाना चाहिए। यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्थान है जहाँ प्रकृति, आस्था और इतिहास का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है। Myambikapur.com आपको इस दिव्य घाट की यात्रा पर ले चलता है। Shankar Ghat का परिचय Shankar Ghat Ambikapur शहर के किनारे स्थित एक शांत और आध्यात्मिक स्थान है। यहाँ नदी के किनारे बने घाट, हरियाली से घिरे रास्ते, और भगवान शिव का मंदिर—यहां आने वाले हर व्यक्ति को आध्यात्मिक सुकून प्रदान करते हैं। सुबह और शाम के समय घाट का नज़ारा इतना सुंदर होता है कि कई लोग यहाँ ध्यान, वॉक और योग करने आते हैं। Shankar Ghat क्यों खास है? आस्था का प्रमुख केंद्र शंकर घाट अम्बिकापुर (Shankar ghat ambikapur) का शिव मंदिर स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। महाशिवरात्रि, सावन सोमवार जैसे शुभ अवसरों पर यहां काफी भीड़ रहती है। भक्त जलाभिषेक करते हैं, प्रार्थना करते हैं और मंदिर परिसर के शांत वातावरण में बैठकर मन को स्थिर करते हैं। मंदिर का अद्भुत वातावरण और महत्व : शंकर घाट अंबिकापुर में स्थित है, और इसकी खासियत इसे शहर के अन्य मंदिरों से अलग करती है और इसे Best places in Ambikapur में शुमार करती है – नदी के किनारे : यह घाट एक अविरल नदी की धारा के किनारे स्थित है, जो यहाँ के वातावरण को अत्यंत शांत और पवित्र बनाती है। पीपल की छाँव : यहाँ भगवान भोलेनाथ एक विशाल पीपल वृक्ष की घनी, शीतल छाँव में विराजमान हैं। श्मशान से जुड़ाव: यह स्थान श्मशान भूमि के पास स्थित है, जो भगवान शिव के ‘महाकाल’ स्वरूप के अनुरूप है। हिंदू शास्त्रों में, भगवान शिव को श्मशान का अधिपति (Lord of Cremation Grounds) माना जाता है, और यह संयोग इस मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को और भी बढ़ा देता है। धार्मिक मान्यता: जानकारों के अनुसार, श्मशान के समीप, नदी की धारा और पीपल की छाँव में भगवान शिव का विराजित होना अत्यंत शुभकारी और दुर्लभ माना जाता है। यह स्थान जीवन और मरण के चक्र का प्रतीक है। सूर्य मंदिर और छठ पूजा घाट शंकर घाट छठ महापर्व के लिए एक प्रमुख स्थान है। यहां नदी के घाट को छठ महापर्व के समय बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया है। यहाँ सूर्य मंदिर भी है। छठ महापर्व के समय यहाँ श्रद्धालुओं की बहुत भीड़ होती है। प्राकृतिक खूबसूरती का बेजोड़ अनुभव Shankar Ghat Ambikapur की सबसे सुंदर बात है नदी के किनारे बैठने का अद्भुत सुकून। ये सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ कोई भी तनाव दूर हो जाता है। Morning Walk और Meditation का बेहतरीन स्थल Ambikapur शहर के कई लोग रोज सुबह Shankar Ghat आते हैं। इस जगह को morning walk के लिए एक अच्छी जगह बनाते हैं। सुबह का समय इस जगह को और भी सुंदर बना देता है। Photography के लिए Perfect Spot यहां सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का नज़ारा बेहद शानदार होता है। Travel bloggers और photographers के लिए भी यह जगह काफी आकर्षक है। नदी किनारे, पुरानी सीढ़ियाँ, मंदिर का दृश्य—ये सब बेहतरीन फोटो फ्रेम बनाते हैं। मंदिर का इतिहास और महाशिवरात्रि माना जाता है कि शंकर घाट पर भगवान शिव के मंदिर की स्थापना 1971 में महाशिवरात्रि के दिन की गई थी। Shankar Ghat का माहौल और स्थानीय संस्कृति यह स्थान Ambikapur की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है। शाम के समय यहाँ हल्की-फुल्की चहलकदमी, बच्चों की हंसी, और मंदिर की घंटियों की गूंज एक अलग ही माहौल बनाती है। स्थानीय लोग अक्सर यहाँ त्योहार, धार्मिक कार्यक्रम और जल से जुड़े छोटे-छोटे अनुष्ठान भी करते हैं। शंकर घाट पर क्या करें? (आकर्षण) Travel Guide – शंकर घाट कैसे पहुँचें? 📍Location Shankar Ghat, Ambikapur शहर के भीतर ही स्थित है।शहर के मुख्य इलाके से इसकी दूरी बहुत कम है तथा स्थानीय बस, ऑटो और निजी वाहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है। 🕒 घूमने का सही समय सुबह 5:30 से 9 बजे तक – Meditation, Photography और शांत माहौल के लिए perfect शाम 4 बजे से सूर्यास्त तक – नदी किनारे का बेहतरीन दृश्य ⏳ कितना समय लगेगा? पूरी जगह आराम से घूमकर देखने में 1 से 2 घंटे काफी हैं। 🥤 खाने-पीने की सुविधा घाट के पास हल्की-फुल्की चाय-नाश्ते की दुकाने मिल जाती हैं। यदि आप प्रकृति के बीच भोजन करना पसंद करते हैं, तो यहां पिकनिक जैसा अनुभव भी लिया जा सकता है, बस स्वच्छता का ध्यान रखें। Nearby Attractions – पास में अम्बिकापुर में घूमने की जगहें (Best places in Ambikapur) Shankar Ghat के आसपास अम्बिकापुर में घूमने की जगहें हैं, जहां आप आसानी से पहुंच सकते हैं – Kali Mandir (काली मंदिर) – पास में स्थित प्रसिद्ध मंदिर महामाया मंदिर (Mahamaya Mandir) – Ambikapur का प्रमुख देवी मंदिर सांडबार मंदिर – अम्बिकापुर – रायपुर मार्ग में रिंग रोड से 4-5 किलोमीटर दूर स्थित है। Tips for Visitors Shankar Ghat – एक यादगार अनुभव अंबिकापुर (Ambikapur) में शंकर घाट (Shankar Ghat Ambikapur) एक ऐसा स्थान है जहां आस्था, प्रकृति और शांति तीनों का संतुलन मिलता है। यहाँ कुछ देर बैठकर हवा का आनंद लेना, पानी की आवाज सुनना और शांत वातावरण का अहसास करना—ये सब मन को एक नई ऊर्जा देते हैं। अम्बिकापुर में घूमने की जगहें तो बहुत सारे हैं लेकिन उन सबमें शंकर घाट का अलग ही महत्व है। सावन में प्रत्येक सोमवार, छठ पूजा महापर्व और महाशिवरात्रि में यहाँ का दृश्य देखने लायक होता है। यदि आप अभी तक शंकर घाट अम्बिकापुर नहीं आए हैं, तो आपको अवश्य एक बार इस अद्भुत जगह पर जाना चाहिए। छठ पूजा 2025 – सूर्य उपासना का पवित्र पर्व यह भी पढ़ें बांकी डैम अंबिकापुर का खूबसूरत पिकनिक स्पॉट | Banki Dam Ambikapur – Amazing Picnic Spot

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महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति द्रौपदी मुर्मू जी का 20 नवम्बर को अम्बिकापुर आगमन

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अम्बिकापुर की धरती एक बार पुनः इतिहास रचने जा रही है। आगामी 20 नवंबर को, देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का आगमन हमारे प्रिय अम्बिकापुर शहर में होने जा रहा है।

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2026 में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें — सम्पूर्ण गाइड

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भारत में हर साल लाखों विद्यार्थी सरकारी नौकरी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, डिफेंस, राज्य सेवा आयोग — हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ चुकी है कि अब केवल मेहनत नहीं, बल्कि स्मार्ट रणनीति और निरंतर प्रयास से ही सफलता संभव है।

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देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह कथा | भगवान विष्णु के शयन और जागरण की पौराणिक कहानी | Dev Uthani Ekadashi & Tulsi Vivah Katha in Hindi

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देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह कथा: जानिए भगवान विष्णु के चार महीने के शयन से लेकर उनके जागरण तक की दिव्य कहानी। तुलसी विवाह का महत्व, व्रत विधि, पूजा विधान और 2025 की तिथि सहित सम्पूर्ण जानकारी पढ़ें।

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